भाग 1 – आख़िरी युद्ध से पहले की रात
उत्तर यूरोप के बर्फीले पहाड़ों और काले जंगलों के बीच एक ऐसा इलाका था जिसे लोग ड्रैगनफोर्ड वैली कहते थे।
यह जगह मानचित्रों में तो थी… लेकिन इंसानों के दिलों में नहीं।
क्योंकि वहां एक ऐसा साम्राज्य था जिसे लोग फुसफुसाकर याद करते थे —
“ब्लैक मोरगाथ साम्राज्य”
कहा जाता था कि उसकी सीमाओं की रक्षा कोई सेना नहीं करती…
बल्कि नरक के शैतान करते हैं।
जो भी सेना उस साम्राज्य को जीतने गई…
वह कभी वापस नहीं लौटी।
और आज…
मैं वही करने जा रहा था जो इतिहास में किसी ने करने की हिम्मत नहीं की।
मेरा नाम है…
एड्रियन वैल।
मैंने अपने जीवन में दर्जनों युद्ध लड़े हैं।
छोटे राज्यों को कुचला है…
किलों को जलाया है…
और राजाओं को उनके ही सिंहासन पर मार गिराया है।
लेकिन सच कहूं…
आज की जंग अलग है।
आज पहली बार…
मेरे अपने दिल में डर है।
मेरे सामने एक विशाल पहाड़ी मैदान फैला हुआ था।
दूर आसमान में काले बादल ऐसे घूम रहे थे जैसे किसी दानव की सांसें हों।
हवा में अजीब सी गंध थी।
खून और राख की गंध।
मेरे पीछे लगभग तीन हजार सैनिकों की सेना थी।
लेकिन आज…
उनकी आंखों में वह चमक नहीं थी जो आमतौर पर युद्ध से पहले होती है।
सब चुप थे।
अजीब तरह की खामोशी पूरे शिविर में फैली हुई थी।
मेरे सबसे भरोसेमंद योद्धा कैप्टन एलियास ग्रे मेरे पास आया।
उसने धीरे से कहा —
“कमांडर… अभी भी वक्त है…
हम वापस लौट सकते हैं।”
मैंने उसकी तरफ देखा।
उसकी आंखों में डर साफ दिखाई दे रहा था।
लेकिन मैंने हंसते हुए कहा —
“एलियास…
इतिहास उन लोगों को याद नहीं रखता जो डरकर भाग गए।”
वह चुप हो गया।
लेकिन उसकी आंखें मुझे एक ही बात कह रही थीं।
“हम सब मरने वाले हैं।”
उस रात हमने युद्ध से पहले का जश्न मनाने का फैसला किया।
क्योंकि…
किसी को नहीं पता था कि
कल सुबह कौन जिंदा रहेगा।
बड़े बड़े अलाव जलाए गए।
मदिरा के पीपे खोले गए।
सैनिक जोर जोर से हंस रहे थे…
गीत गा रहे थे…
लेकिन उनकी हंसी के पीछे छिपा डर मैं साफ देख सकता था।
एक सैनिक बोला —
“अगर हम जीत गए तो मैं ड्रैगनफोर्ड का राजा बन जाऊंगा!”
दूसरा हंसकर बोला —
“और अगर हार गए?”
पहला सैनिक कुछ सेकंड चुप रहा।
फिर बोला —
“तो कम से कम आज की रात तो जिंदा हैं…”
और फिर सब जोर से हंस पड़े।
लेकिन मैं जानता था…
यह हंसी नकली थी।
रात धीरे धीरे गहरी होती जा रही थी।
आसमान में चांद था…
लेकिन उसकी रोशनी भी अजीब सी लाल लग रही थी।
जैसे आसमान पहले ही खून से भर चुका हो।
धीरे धीरे सैनिक नशे में धुत होकर जमीन पर सोने लगे।
कहीं कोई घोड़े के पास पड़ा था…
कहीं कोई तलवार पकड़े हुए ही सो गया था।
मैं अपने तंबू के बाहर खड़ा दूर जंगल की तरफ देख रहा था।
ड्रैगनफोर्ड का जंगल।
जिसके बारे में कहा जाता था…
वहां पेड़ों की जड़ों में इंसानों की हड्डियां दबी हैं।
और रात में…
पेड़ों के बीच से
किसी के रोने की आवाज आती है।
मैंने अपनी तलवार को देखा।
यह तलवार मेरे साथ बारह युद्धों में रही थी।
लेकिन आज…
मुझे पहली बार लगा कि शायद यह भी मुझे नहीं बचा पाएगी।
मैंने आसमान की तरफ देखा।
“अगर कोई भगवान है…”
मैं बुदबुदाया —
“तो आज मेरी मदद करना।”
लेकिन जवाब में सिर्फ हवा चली।
और तभी…
दूर जंगल के अंदर कुछ हिला।
मैंने अपनी आंखें सिकोड़कर देखा।
पहले मुझे लगा कोई जानवर होगा।
लेकिन फिर…
मुझे दो लाल आंखें दिखाई दीं।
फिर चार।
फिर दस।
फिर…
सैकड़ों।
मेरा दिल एक पल के लिए रुक गया।
मैंने तुरंत तलवार खींची।
“सभी सैनिक जागो!”
मैं पूरी ताकत से चिल्लाया।
लेकिन तब तक…
बहुत देर हो चुकी थी।
जंगल के अंदर से अचानक ऐसी आवाज आई…
जैसे हजारों जानवर एक साथ चीख रहे हों।
और अगले ही पल…
अंधेरे से वे चीजें बाहर निकलीं।
वे इंसान नहीं थे।
जानवर भी नहीं।
उनका शरीर इंसानों जैसा था…
लेकिन उनकी त्वचा काली और जली हुई थी।
आंखें लाल अंगारों जैसी।
मुंह से नुकीले दांत बाहर निकले हुए।
और उनके हाथों में ऐसे हथियार थे…
जो मैंने अपनी पूरी जिंदगी में कभी नहीं देखे।
लंबे काले भाले…
जिनके सिरे से धुआं निकल रहा था।
पहला हमला इतना तेज था कि हमारे सैनिकों को समझने का मौका ही नहीं मिला।
एक शैतान ने भाला फेंका।
और वह सीधे एक सैनिक के सीने में घुस गया।
अगले ही पल…
धड़ाम!
उसका शरीर हवा में फट गया।
खून और मांस के टुकड़े चारों तरफ बिखर गए।
सैनिक चीखने लगे।
“शैतान!!”
“ये इंसान नहीं हैं!!”
हर तरफ अफरा तफरी मच गई।
मैंने अपनी तलवार उठाई और पहले शैतान की तरफ दौड़ा।
उसने मुझ पर हमला किया।
मैंने उसकी गर्दन पर पूरी ताकत से वार किया।
छन्न!
मेरी तलवार उसकी हड्डियों से टकराई।
और फिर…
उसका सिर जमीन पर गिर गया।
लेकिन जो मैंने देखा…
उसने मेरी आत्मा तक जमा दी।
उसका कटा हुआ सिर जमीन पर गिरकर…
मुस्कुरा रहा था।
और उसका शरीर अभी भी खड़ा था।
फिर अचानक…
वह शरीर राख बनकर उड़ गया।
चारों तरफ युद्ध शुरू हो चुका था।
चीखें…
खून…
तलवारों की टकराहट…
और उन शैतानों की भयानक गुर्राहट।
यह युद्ध नहीं था।
यह…
किसी नरक का दरवाजा खुलने जैसा था।
घंटों तक लड़ाई चलती रही।
रात धीरे धीरे खत्म हो रही थी।
जब आखिरकार…
आसमान में पहली रोशनी दिखाई दी।
और तभी अचानक…
कुछ अजीब हुआ।
वे सारे शैतान एक साथ रुक गए।
उन्होंने आसमान की तरफ देखा।
और फिर…
एक भयानक चीख के साथ…
सब हवा में उड़कर गायब हो गए।
पूरा मैदान अचानक शांत हो गया।
मैंने चारों तरफ देखा।
जहां तीन हजार सैनिक थे…
अब वहां मुश्किल से बारह सौ बचे थे।
बाकी…
सब मर चुके थे।
मेरे हाथ खून से भरे हुए थे।
मेरे चारों तरफ…
सिर्फ लाशें थीं।
मैं घुटनों के बल जमीन पर बैठ गया।
मेरे सैनिक थक कर वहीं बैठ गए।
किसी में बोलने की ताकत नहीं थी।
किसी में रोने की भी नहीं।
सबके चेहरों पर सिर्फ एक सवाल था —
“ये आखिर था क्या?”
और सच कहूं…
उस वक्त मेरे पास भी कोई जवाब नहीं था।
लेकिन मुझे नहीं पता था…
कि यह तो सिर्फ शुरुआत थी।
क्योंकि असली डर…
अभी बाकी था।
भाग 2 – शैतानों का रहस्य
सुबह की ठंडी हवा मैदान में फैले खून की गंध को अपने साथ घसीट रही थी।
जहां रात को हमारी सेना के हजारों सैनिक थे…
वहां अब सिर्फ लाशों का ढेर पड़ा था।
कटे हुए हाथ…
टूटी तलवारें…
जले हुए शरीर…
और जमीन पर जमी खून की मोटी परत।
मैं कुछ देर तक वहीं खड़ा रहा।
मेरे हाथ में तलवार थी… लेकिन अब वह भारी लग रही थी।
मेरे पास खड़े कैप्टन एलियास ग्रे की आवाज कांप रही थी।
“कमांडर… ये… ये क्या थे?”
मैंने कोई जवाब नहीं दिया।
क्योंकि सच यह था…
मुझे भी नहीं पता था।
हमने कई युद्ध देखे थे।
जंगली कबीले… बर्बर योद्धा… खूंखार सैनिक…
लेकिन रात को जो हमने देखा था…
वो किसी भी इंसानी सेना जैसा नहीं था।
मैंने गहरी सांस ली और जोर से चिल्लाया —
“जो जिंदा हैं… खड़े हो जाओ!”
धीरे-धीरे सैनिक उठने लगे।
कई घायल थे।
कई खड़े भी मुश्किल से हो पा रहे थे।
मैंने आदेश दिया —
“घायलों को मरहम पट्टी दो…
जो मर चुके हैं उन्हें यहीं दफना दो।”
एक सैनिक रोते हुए बोला —
“कमांडर… हम वापस चलें?”
मैंने उसकी तरफ देखा।
कुछ सेकंड तक चुप रहा।
फिर बोला —
“नहीं।”
मेरे शब्द सुनते ही कई सैनिकों के चेहरे सफेद पड़ गए।
“यह युद्ध हमारा आखिरी युद्ध है…
और मैं बिना जीते वापस नहीं जाऊंगा।”
मेरी आवाज में जिद थी।
सत्ता की भूख…
जिसने मेरे दिल को पत्थर बना दिया था।
लेकिन सच्चाई यह थी…
कि मेरे अपने दिल में भी डर था।
मैंने कुछ सैनिकों को अपने साथ लिया और कहा —
“मैं जंगल की तरफ जा रहा हूं।”
एलियास ने पूछा —
“क्यों?”
मैंने जवाब दिया —
“क्योंकि वहां कोई है… जो शायद हमें बता सके कि हम किससे लड़ रहे हैं।”
ड्रैगनफोर्ड का काला जंगल
हम पांच घोड़ों पर सवार होकर जंगल की तरफ निकल पड़े।
जंगल के अंदर कदम रखते ही ऐसा लगा जैसे दुनिया बदल गई हो।
पेड़ बहुत ऊंचे थे।
उनकी टेढ़ी-मेढ़ी शाखाएं ऐसे दिख रही थीं जैसे किसी दानव के हाथ।
हवा अजीब तरह से ठंडी थी।
और सबसे डरावनी बात…
जंगल में कोई आवाज नहीं थी।
न पक्षियों की…
न जानवरों की…
बस हवा की सीटी।
हम धीरे-धीरे अंदर बढ़ते गए।
कुछ देर बाद हमें दूर एक छोटा सा पत्थर का चर्च दिखाई दिया।
वह बहुत पुराना था।
दीवारों पर काई जमी थी।
और उसकी छत आधी टूट चुकी थी।
लेकिन उसके अंदर रोशनी जल रही थी।
मैं घोड़े से उतरा।
दरवाजा धीरे से खोला।
अंदर एक बूढ़ा आदमी घुटनों के बल बैठा प्रार्थना कर रहा था।
उसके लंबे सफेद बाल थे।
और उसने काले रंग का पादरी वाला चोगा पहन रखा था।
उसने बिना पीछे देखे कहा —
“मैं जानता था… तुम आओगे।”
मैं ठिठक गया।
“तुम जानते थे?”
वह धीरे-धीरे खड़ा हुआ।
उसकी आंखें अजीब थीं।
जैसे वह सब कुछ पहले से जानता हो।
“तुम एड्रियन वैल हो।”
मैंने तलवार कसकर पकड़ी।
“तुम्हें मेरा नाम कैसे पता?”
वह हल्का सा मुस्कुराया।
“क्योंकि तुम्हारे आने की भविष्यवाणी बहुत पहले हो चुकी थी।”
मेरे सैनिक घबरा गए।
मैंने कहा —
“अगर तुम जानते हो तो मुझे यह भी बताओ…
हमने रात को किससे लड़ाई की?”
पादरी कुछ सेकंड चुप रहा।
फिर उसने कहा —
“तुमने नरक के सैनिकों से लड़ाई की है।”
मेरे सैनिकों के चेहरे सफेद पड़ गए।
मैं गुस्से में बोला —
“बकवास मत करो!”
वह धीरे से बोला —
“यह बकवास नहीं है।”
फिर वह चर्च के अंदर एक लकड़ी की मेज के पास गया।
वहां एक छोटा कांच का शीशा रखा था।
उसके अंदर गहरा लाल तरल था।
पादरी ने उसे उठाया।
और मेरी तरफ बढ़ाया।
“यह…”
उसने धीमी आवाज में कहा —
“जीसस का लहू है।”
मेरे सैनिक एकदम पीछे हट गए।
मैंने हैरानी से पूछा —
“क्या?”
पादरी बोला —
“यह पवित्र रक्त है।
इसकी एक बूंद भी शैतानों को राख बना सकती है।”
मैंने शीशे को ध्यान से देखा।
उसके अंदर का तरल अजीब तरह से चमक रहा था।
जैसे उसमें कोई जीवित चीज हो।
“इसे अपने हर सैनिक के शरीर पर एक-एक बूंद लगा देना।”
मैंने पूछा —
“और इससे हम जीत जाएंगे?”
पादरी की आंखें अचानक गंभीर हो गईं।
“हाँ… लेकिन एक शर्त है।”
“क्या?”
वह धीरे-धीरे बोला —
“तुम्हें यह युद्ध शाम के पांच बजे से पहले जीतना होगा।”
मैंने भौंहें सिकोड़ लीं।
“अगर नहीं जीते तो?”
पादरी ने मेरी आंखों में देखते हुए कहा —
“तो तुम भी उन्हीं की तरह बन जाओगे।”
चर्च के अंदर अचानक सन्नाटा छा गया।
मेरे सैनिक डर से कांपने लगे।
मैंने शीशा पकड़ लिया।
मेरे अंदर फिर वही लालच जाग उठा।
राज्य का लालच।
मैंने कहा —
“अगर यह मेरी जीत की कीमत है…
तो मैं यह कीमत चुकाऊंगा।”
पादरी ने मुझे कुछ देर तक घूरा।
फिर धीरे से बोला —
“याद रखना एड्रियन…
कुछ जीतें… इंसान को हमेशा के लिए हार बना देती हैं।”
शैतानों का सच
मैं जाने के लिए मुड़ा।
लेकिन अचानक मैंने पीछे से पादरी की आवाज सुनी —
“क्या तुम जानते हो वह साम्राज्य ऐसा क्यों है?”
मैं रुक गया।
“क्यों?”
वह बोला —
“क्योंकि वहां के लोगों ने बहुत साल पहले…
नरक से समझौता किया था।”
मेरे सैनिक डर से एक दूसरे को देखने लगे।
पादरी बोला —
“उन्होंने अपनी आत्माएं शैतानों को बेच दीं…
बदले में उन्हें अजेय सेना मिली।”
मैंने पूछा —
“तो वहां रहने वाले लोग?”
पादरी की आवाज भारी हो गई।
“वे अब इंसान नहीं हैं…”
“तो क्या हैं?”
उसने धीरे से कहा —
“नरक के गुलाम।”
मेरी रीढ़ में ठंडक दौड़ गई।
लेकिन अब बहुत देर हो चुकी थी।
मैंने शीशा अपने कवच के अंदर रखा।
घोड़े पर बैठा।
और अपने सैनिकों से कहा —
“हम युद्ध के मैदान में लौट रहे हैं।”
जंगल से बाहर निकलते समय मुझे ऐसा लगा…
जैसे पेड़ों के बीच कोई हमें देख रहा हो।
कई लाल आंखें…
जो अंधेरे में चमक रही थीं।
वापसी
जब हम शिविर पहुंचे…
मेरे सैनिक इंतजार कर रहे थे।
मैंने शीशा निकाला।
और सबको बताया —
“यह पवित्र रक्त है।”
सैनिकों के शरीर पर एक-एक बूंद डाली गई।
जैसे ही रक्त उनकी त्वचा को छूता…
वह हल्का सा जलने लगता।
लेकिन साथ ही उनके अंदर अजीब ताकत महसूस होती।
सूरज धीरे-धीरे ऊपर चढ़ रहा था।
मैंने तलवार उठाई।
और चिल्लाया —
“आज हम इतिहास लिखेंगे!”
सैनिकों ने कमजोर लेकिन गूंजती आवाज में जवाब दिया —
“युद्ध!”
हम सब उस साम्राज्य की तरफ बढ़ने लगे।
दूर पहाड़ के ऊपर…
काले पत्थरों से बना एक विशाल किला दिखाई दे रहा था।
ब्लैक मोरगाथ साम्राज्य।
लेकिन मुझे नहीं पता था…
कि उस किले के अंदर…
हमारा इंतजार सिर्फ शैतान नहीं कर रहे थे।
वहां एक ऐसा सच छिपा था…
जो मेरी आत्मा को हमेशा के लिए बदल देने वाला था।
और शाम के पांच बजे से पहले…
मुझे फैसला लेना था —
राज्य… या इंसानियत।
लेकिन उस वक्त…
मैं सिर्फ एक चीज चाहता था।
सत्ता।
और सत्ता के लिए…
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