Smile Please 😁
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| Mack enters the forbidden basement and discovers terrifying secrets hidden beneath the church. |
Part – 2
The Bell Beneath the Church
Dark Church Mystery | Written by Reax
रात के उस भयानक दृश्य के बाद…
जब मेरी आंख खुली—
मैं चर्च के पुराने लकड़ी के फर्श पर पड़ा हुआ था। मुझे याद भी नहीं मै यहां कब से बेहोश पड़ा हूं क्या ये सपना है
या फिर कोई हकीकत मेरी समझ में कुछ नहीं आ रहा था। क्या मैं जिंदा हूं या मुर्दा मुझे तो ठीक से ये भी पता
नहीं है मेरे सामने जो मोमबत्तियां जल रही थी
मोमबत्तियाँ बुझ चुकी थीं।
चारों तरफ अंधेरा था। आस पास कुछ भी साफ नहीं दिखाई दे रहा था
लेकिन…
एक आवाज अभी भी मेरे कानों में गूंज रही थी—
“Smile… Please…”
और बार बार यही आवाज आ रही थी जिसको मैं सुनना भी नहीं चाहता हूं लेकिन क्या करूं
मैंने कांपते हुए अपनी आंखें खोलीं।
दरवाजा बंद था।
बाहर बर्फ गिर रही थी।
लेकिन दरवाजे के नीचे से मिट्टी अंदर तक चली आई थी…
ठीक वैसी ही मिट्टी जैसी किसी कब्र से निकलती है। पर कैसे निकल आई है शायद ये जमीन के अंदर बने होने के कारण ऐसा
हो सकता है या कुछ और ये सब देखकर
मेरा दिल तेजी से धड़कने लगा।
मैंने खुद को समझाया—
“नहीं…
ये सपना था…
सिर्फ सपना…” और कुछ भी नहीं कोई मेरे दिमाग के साथ खेल रहा था पर कौन उसको मुझसे क्या चाहिए़
मुझे तो ये भी पता नहीं क्या कोई जानबूझकर मुझे इन सब चक्कर में फंसाना चाहता है
लेकिन तभी मेरी नजर फर्श पर पड़ी।
वहां…
गीले पैरों के निशान बने हुए थे। जैसे कोई अभी अभी इस फर्श पर पड़ी मिट्टी पर चलकर गया हो
और वो निशान सीधे चर्च के नीचे बने तहखाने की तरफ जा रहे थे…
उस तहखाने की तरफ…
जहां जाने से सिस्टर अगस्त्या ने मुझे हमेशा मना किया था। क्या उसके नीचे कुछ ऐसा है जिससे मुझे हमेशा सिस्टर अगस्त्या
बचाती रहती थी उन्हें भी कहां पता था जिससे वो मुझे बचाना चाहती थी वहां मै किसी ने किसी समय जरूर जाने वाला था।
चर्च का बंद तहखाना
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| Mack wakes up inside a terrifying abandoned church after a horrifying night in Smile Please Chapter 2. |
मैंने पहले कभी उस जगह के बारे में सोचने की कोशिश नहीं की थी।
सिस्टर अगस्त्या हमेशा कहती थी—
“हर चर्च में ईश्वर नहीं रहते मैक…
कुछ जगहों पर लोग अपने पाप छुपाते हैं।” जो इस दुनिया के सामने अपने आप को अच्छा दिखाते हो और पीठ पीछे उनसे बुरा भी शायद कोई और हो जो शैतानों से भी बुरा हो सकता है
लेकिन उस वक्त मैं बच्चा था।
मुझे लगता था वो मजाक कर रही हैं। और उनकी कही हुई इस बात को काश में समझ पाता
लेकिन आज…
उनकी हर बात अलग लग रही थी। मै खुद भी समझ नहीं पा रहा था क्या मेरे लिए सही है क्या गलत है मुझे आगे क्या करना चाहिए कुछ भी मुझे पता नहीं है।
मैं धीरे धीरे सीढ़ियों की तरफ बढ़ रहा था हर कदम मुझे एक नया एहसास याद दिला रहा था जैसे कि मैं कोई नई जगह
आ गया हूं
हर कदम के साथ लकड़ी चरमराती थी।
नीचे से सड़ी हुई बदबू आ रही थी। कुछ अजीब सी
और फिर…
टन…
टन…
टन…
चर्च की घंटी अपने आप बजने लगी।
रात के ठीक 3 बजे। आमतौर पर ऐसा कभी भी नहीं होता है किसी भी चर्च में लेकिन आज हो रहा था
मैं रुक गया।
क्योंकि पूरे जिनेवा में एक बात मशहूर थी—
“अगर चर्च की घंटी रात 3 बजे खुद बजे…
तो समझ लो कोई मर चुका है।
या फिर…
कोई लौट आया है।” ऐसा जो इंसान नहीं है
मेरे हाथ कांप रहे थे।
लेकिन फिर भी मैं नीचे उतरता गया।
तहखाने का सच
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| Mack discovers terrifying symbols and dark secrets hidden beneath the church. |
तहखाने का दरवाजा आधा खुला हुआ था। उसे धक्का देने से पहले मेरा दिल तेज तेज धड़क रहा था जैसे कि कुछ
घटना होने वाली हो लेकिन अपने मन को मजबूत करके
मैंने उसे धक्का दिया।
दरवाजा खुलते ही…
मेरी सांसें रुक गईं।
दीवारों पर हजारों अजीब निशान बने हुए थे।
काले रंग से लिखे नाम…
सूखे हुए खून के धब्बे…
और लकड़ी के क्रॉस उल्टे लटके हुए थे। और वहां पहले से कई नन मरी हुई पड़ी थी इसको देखकर मेरे मन में सवाल आया
ये पहली बार नहीं हुआ है इससे पहले भी कई नन की जान जा चुकी है और सिस्टर एग्नेस आखिरी नहीं इसके बाद और
भी सिस्टरो की जान जाने वाली है तभी मेरी नजर
कमरे के बीचोंबीच एक कुर्सी रखी थी।
उस कुर्सी पर…
सिस्टर एग्नेस बैठी थी।
उनकी आंखें खुली हुई थीं। ऐसा लग रहा था वो मुझे ही देख रही हो या मेरा इंतजार कर रही हो।
लेकिन…
वो मर चुकी थीं।
उनका शरीर बिल्कुल शांत था।
फिर भी उनके होंठ धीरे धीरे हिल रहे थे— और बार बार बस एक ही बात कह रही थी
“Smile… Please…” ये सुनकर
मैं पीछे हट गया।
“नहीं… नहीं… ये सच नहीं हो सकता…”
तभी अचानक…
एग्नेस की गर्दन टूटने जैसी आवाज के साथ मेरी तरफ घूमी।
उनकी आंखों से काला खून बहने लगा।
और उन्होंने मुस्कुराकर कहा—
“वो वापस आ चुकी है मैक…” मैने पूछा
“क… कौन…?” कौन आ चुका है मुझे साफ साफ बताओ कौन और तुम किसकी बात कर रही हो
तभी कमरे की सारी मोमबत्तियाँ एक साथ बुझ गईं।
पूरा तहखाना अंधेरे में डूब गया।
और उसी अंधेरे में…
मुझे किसी के धीरे धीरे चलने की आवाज सुनाई दी।
ठक…
ठक…
ठक…
जैसे कोई नंगे पैरों से गीली मिट्टी पर चल रहा हो।
फिर…
मेरे कान के बिल्कुल पास किसी ने फुसफुसाया—
“तुमने मुझे बुलाया था ना…”
मैंने डरकर पीछे देखा—
और इस बार…
सिस्टर अगस्त्या मेरे बिल्कुल पीछे खड़ी थी। जिसको देखकर मैं एक पल के लिए खुश हो गया था लेकिन अगले ही पल
मैने उनकी तरफ देखा वो अब इंसान नहीं लग रही थी।
उनका चेहरा फटा हुआ था।
आंखें पूरी काली थीं।
होठ कानों तक फटे हुए थे। जैसे कि किसी ने उनके दोनों गाल फाड़ दिए हो
और उनकी मुस्कान… ऐसी देखकर कोई भी मर जाएं
इतनी बड़ी थी कि इंसानी चेहरा उसे सह ही नहीं सकता था।
उन्होंने धीरे से मेरा चेहरा पकड़ा…
और बोलीं—
“तुम रोते बहुत हो मैक…”
“मैंने क्या कहा था?” इस दुनिया में कुछ भी सच नहीं जो तुम मुझे देख रहे हो वो भी नहीं कुछ तो बोलो मैक।
मेरे होंठ कांप रहे थे।
मैं कुछ बोल भी नहीं पा रहा था।
उन्होंने अपना माथा मेरे माथे से लगाया…
और फुसफुसाईं—
“Smile… Please…”
वो चीज जो इंसान नहीं थी
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| Mack realizes the creature standing before him is no longer Sister Agastya. |
अचानक मुझे एहसास हुआ—
ये सिस्टर अगस्त्या नहीं है।
ये कुछ और है।
कुछ ऐसा…
जो इंसानों के दुख से पैदा होता है।
जो दर्द में पलता है।
और शायद…
मैंने ही उसे जन्म दिया था।
मेरे रोने…
मेरे गुस्से…
मेरी नफरत ने…
उसे इस दुनिया में आने का रास्ता दिया था। जिसे वापस उस दुनिया में भेजना नामुमकिन है लेकिन
मै उन्हें वापस भेजकर रहूंगा चाहे कुछ भी क्यू न हो जाए।
तभी तहखाने की दीवारों पर लिखे सारे नाम चमकने लगे।
मैंने ध्यान से देखा।
वो सभी नाम उन लोगों के थे…
जो इस चर्च में मरे थे।
और सबसे नीचे…
एक नया नाम लिखा था—
मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई। ये क्या है मै फिर कौन हूं।
“नहीं…”
“मैं जिंदा हूं…”
लेकिन तभी…
मुझे अपना शरीर फर्श पर पड़ा दिखाई दिया।
मेरे सिर से खून बह रहा था।
और मैं…
अपने ही मृत शरीर को देख रहा था।
मौत के बाद की मुस्कान
मैं समझ चुका था।
उस रात…
जब मैं बेहोश हुआ था…
मैं मर चुका था।
और अब…
जो चर्च में घूम रहा था…
वो मैं नहीं था।
सिस्टर अगस्त्या मुस्कुरा रही थीं।
धीरे धीरे पूरा चर्च हंसने की आवाजों से भर गया।
बच्चों की हंसी…
औरतों की हंसी…
रोते हुए लोगों की हंसी…
सब एक साथ।
फिर अचानक…
पूरे अंधेरे में सिर्फ दो शब्द गूंजे—
“SMILE PLEASE 😁”
आगे आने वाले भाग में…
चर्च के नीचे आखिर क्या छुपाया गया था?
क्या सिस्टर अगस्त्या पहले से ही इंसान नहीं थीं?
मैक सच में मर चुका है या उसकी आत्मा फंसी हुई है?
“Smile Please” कोई श्राप है या किसी दानव का नाम?
और आखिर 1872 में चर्च की सीढ़ियों पर छोड़ा गया बच्चा…
सच में इंसान था भी या नहीं?
To Be Continued…
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