खूनी खेल


 खूनी खेल

अध्याय 1: रहस्यमयी वैज्ञानिक

घने जंगल के बीच बसा सिंहगढ़ किला, गहना से


एक दिन, कॉलेज के छह दोस्त- विक्रम, रोहन, समीर, आयुष, सिया और नीलकंठ -को


"अगर राक्षस सच में रोमांच पसंद है, तो सिंहगढ़ किले में आधी रात को आओ। मेरे लिए एक खास खेल रखा गया है।"


ये सभी अचंभित कर देने वाले रह गए। किसी को नहीं पता था कि ये मैसेज भेजा गया है. लेकिन एडवेंचर के शौकीन ये युवा बिना कुछ सोचे आधी रात को किले में जाने के लिए तैयार हो गए।



अध्याय 2: खेल की शुरुआत

किले के पास पहुँचते ही घना कोहरा छा गया। पुरानी, ​​टूटी फूटी दीवारों से हवा सरसराने की आवाज आ रही थी। प्रवेश द्वार पर एक पुराना ख़ून से साना वुड का बोर्ड तांगा था, जिस


"शुरू हो गया है, लेकिन इसके लिए पूरी कीमत अदा की गई!"


ये देखकर नील


लेकिन विक्रम ने हंसते हुए कहा, "अरे, ये सब सिर्फ देखने के लिए हैं। आओ, अंदर आ जाओ!"


अंदर घुसते ही दरवाजा अपने-आप बधम्म!


अब वे खोये हुए थे।



अध्याय 3: पहला शिकार

किले के मुख्य हॉल में, एक पुरानी लकड़ी के माह पर एक लाल रंग का बॉक्स रख


"जिंदा रहने के लिए संघर्ष हर चुनौती पूर्ण करना होगा!"


समीर ने जैसे ही बॉक्स खोला, अंदर से एक खून से सना कार्ड नि


"पहली चुनौती-सच्चाई का दर्पण। जो सबसे बड़ा वोट होगा, वही सबसे पहले मरेगा!"


दीवार पर एक पुराना दृश्य दिखाई देने वाला दृश्यचमक उठा। सभी सामग्री देखने में लगें। लेकिन जैसे ही


"तूने अपने दोस्त को धोखा दिया...तूने आयुष की बहन को विश्वास दिला दिया!"


समीर घबरा गया, "नहीं, ये


लेकिन उसी समय दर्पण से एक काली परछाई और समीर की पुरानी होल्ड ली। हवा में शटरस्टॉक लुढ़क गया।


चटक!


अघ


सभी चीख पड़े। निक्की रोने लगी, "हमें यहां से नहीं।"


अध्याय 4: दूसरे शिकार की बारी

दरवाज़ा अपने-आप


"अब बारी है डर के खेल की! अगर शार्क को देखना है, तो अपने सबसे बड़े डर का सामना करो!"


अल्प, अव्यवस्थित स्थान। विक्रम को लगा कि वह किसी सुसान कु के पास खड़ा है। बचपन में वह एक गंभीर कुँए में गिरा था और मरते-मरते बचा था। अब जो सामने था!


उसकी चीख गूंज गूंज उठीं। अदृश्य हाथों ने उसे परमाणु ऊर्जा में खींच लिया!


"बचाओ!!"


लेकिन कोई कुछ नहीं कर सका. एक पल बाद क्यूँ से सिर्फ खून का फव्वारा निक


अध्याय 5: रहस्य का रहस्य

अब सिर्फ चार लोग बच गए


आयुष काँ


सिया को अचानक एक पुरानी किताब मिली। आख़िरकार


"सिंहगढ़ किले में एक राजा ने 100 दुर्बल लोगों की हत्याएं की थीं। उनकी आत्माएं अब हर 50 साल बाद लौटती हैं, और जो भी यहां आती हैं, जो उन बेगुनाहों ने सहा था उन्हें पीड़ा दी थी।"


रो


आख़िरकार एक और


"अंतिम खेल: नाव का एक ही रास्ता है - बलि दो या बलि चढ़ो!"


सभी एक-दूसरे की ओर देखें। किसी को भी छुट्टी का रास्ता नहीं दिख रहा था।


अध्याय 6: खूनी अंत

निज़ाम ने कांपते हुए कहा, "अगर हमें कोई बलि नहीं चाहिए।"


सिया ने अपनी बात पूरी तरह से कही, 'कोई एक पत्थर कुर्बान कर दे!'


अचानक, अचानक रोहन ने चाकू उठा लिया और एक चूहे के शरीर में घोंप दिया!


"मुझे मरना नहीं है!"


आयुष तड़प


अचानक, तूफान की भयानक चीखें गूंज उठीं। मित्र


पर तब...


रोहन का शरीर हवा में उठा और उसके सिर का धड़ से अलग हो गया!


अब सिर्फ सिया और निज़ामुद्दीन बिकाऊ हैं। उनका अनुवाद बाहर की ओर किया गया। बाहरी ही दरवाजा ज़ोरो


अध्याय 7: यह सच क्या है?

अगले दिन, जब गाँववालों को पता चला कि कुछ बच्चे किले में गए हैं, तो वे वहाँ पहुँच गए। उन्हें बस सियाया और कंकाल रसायन मिलें।


ले


जब निकेल ने तीन गोलियाँ बनाईं, तो उनकी धारियाँ अब सफेद हो गईं। वह अब इंसान नहीं थी।


खूनी खेल ठीक नहीं हुआ था...बल्की ये तो अभी शुरू हुआ था!


ख़त्म... या शायद नहीं?



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