MOTHER MERRY The Wish That Bleeds Back Пролог (Prologue) У каждой желания есть цена. А некоторые желания… вовсе не предназначены для людей. На земле Jordan существует поверье: если человек ровно в полночь искренне загадает невозможное желание — приходит Mother Merry . Она не исполняет желания… она пожирает того, кто осмелился его попросить. И если кто-то, увидев её, испугается — его душа ломается в тот же миг. Глава 1 : Плач Место: Jordan, окраины Amman Дом: Wezli House Дом семьи Wezli снаружи напоминал древний дворец — высокие стены, железные ворота и густой лес позади, который ночью казался дышащим. В доме жили семь человек — мать, отец, две дочери, маленький сын и бабушка с дедушкой. То утро было совершенно обычным… пока за завтраком не прозвучали эти слова. Старшая дочь, Sara Wezli , выглядела бледной. Под её глазами лежали тёмные круги, словно она не спала много ночей подряд. Дрожащим голосом она сказала: — Mom… Dad… я ночью слышала очень громкий плач. Ложки замерли в воздухе....
# ** हवानी किताब का श्राप 4 ** --- ## **
अध्याय 1: रहस्यमयी किताब **
अर्जुन और मीरा को एक बार फिर एक अज्ञात स्रोत से एक पत्र प्राप्त हुआ। पत्र में केवल एक ही वाक्य लिखा था- "हैवानी किताब अभी भी ज़िंदा है।" यह परीक्षण ही उनका रोंगटे हो गया। उन्होंने तो इसे नष्ट कर दिया था, फिर ये मैसेज क्यों आया? --- ## **
अध्याय 2: जंगल की पुकार **
पत्र में एक रहस्यमयी जंगल का ज़िक्र था, जिसे "लोकवन" कहा जाता था। वहां जाकर अर्जुन और मीरा ने फैसला लिया। घने जंगल से उस जंगल में घुसते ही उन्हें लगा कि जैसे कोई उन्हें देख रहा हो। घोड़ों के अवशेषों में फुसफुसा रही थी, और हर कदम पर एक अजीब चीज थी। --- ## **
अध्याय 3: स्मारकीय बनी गुफा **
जंगल के अंदर एक पुरानी गुफा के दरवाज़े पर रहस्यमय बने प्रतीक थे जो किताब पर बने थे। अंदर प्रवेश करते ही अलौकिक हवा का आश्चर्य और आश्चर्य सरसा हाट ने अपना स्वागत किया। अर्जुन और मीरा की साँसें तेज़ हो गईं। --- ## **
अध्याय 4: किताब की वापसी **
गुफाओं के मध्य में, एक पत्थर की वेदियों पर वो किताब लिखी गई थी, जिसे वे नष्ट कर चुके थे। लेकिन इस बार, यह पहले से अधिक सादृश्य दिख रही थी - उसका रंग गहरा काला हो गया था, और उस पर लाल अक्षर ने लिखा था: "तुम मुझसे भाग नहीं सकते।" --- ## **
अध्याय 5: समय का खेल **
जैसे ही अर्जुन ने किताब खोली, पूरी गुफा खोदने लगी। आंखों के सामने सब कुछ आदर्श चित्रण लगा और जब सब साफ हो गए, तो वे किसी अज्ञात युग में स्थापित हो गए। वहां के लोग विचित्र भाषा में बोल रहे थे, और वातावरण में कोई प्राचीन सभ्यता रही थी। --- ## **
अध्याय 6: श्राप का इतिहास **
मीरा को एक गूढ़ साधु मिला, जिसने बताया कि यह पुस्तक एक अभिशापित ग्रंथ है। इसे हमेशा के लिए ख़त्म करने का एक ही उपाय था—विशेष अनुष्ठान इसे जलाना। --- ## **
अध्याय 7: समय की उल्टी धारा **
लेकिन किताब पहले लिखी गई थी, उन्हें अपने समय में वापस लाया गया था। अर्जुन और मीरा ने किताब के कुछ पन्ने पढ़े और अचानक वे फिर से अपने वर्तमान में लौट आए। --- ## **
अध्याय 8: पुस्तक की रक्षा **
उन्होंने पुस्तक को हमेशा के लिए समाप्त करने की योजना बनाई थी, लेकिन तभी कुछ अदृश्य शक्तियों ने उन पर आक्रमण कर दिया। यह साफ हो गया कि किताब खुद को बचाने के लिए किसी भी हद तक जा सकती थी। --- ## **
अध्याय 9: मंदिर का रहस्य **
मीरा को याद आया कि एक प्राचीन मंदिर में इस पुस्तक से जुड़ी गुप्त जानकारी थी। जब वे वहां थे, तो उन्हें एक विशेष रेस्तरां मिल मिल सकता था, जिसमें पुस्तक हमेशा के लिए समाप्त हो गई थी। --- ## **
अध्याय 10: अनुष्ठान की शुरुआत **
मंदिर के संत ने बताया कि पुस्तक को नष्ट करने के लिए आत्मिक बल की आवश्यकता होगी। अर्जुन और मीरा ने अनुष्ठान प्रारंभ किया। --- ## **
अध्याय 11: राक्षसी आत्मा का प्रकोप **
आश्रम की शुरुआत ही सामने किताब से एक भयानक काली छाया उनका आकार लेने लगी। उसकी आँखों में खून जैसी लाल चमक थी, और उसकी चीख से पूरा मंदिर हिल उठा। --- ## **
अध्याय 12: अंतिम युद्ध **
अर्जुन और मीरा ने पूर्ण शक्ति से उस आत्मा का साक्षात्कार लिया। मंत्रों के उच्चारण के साथ, किताबी तूफान लगी और राक्षसी आत्मा एक जादुई चीख के साथ नष्ट हो गई। --- ## **
अध्याय 13: श्राप का अंत ?**
किताब जल गई थी, लेकिन अर्जुन और मीरा का एक अजीब रहस्य सामने आ रहा था - मानो कुछ भी अभी भी अधूरा था। यह श्राप वास्तव में क्या समाप्त हुआ था? --- ## **
अध्याय 14:रहस्यमयी पत्र **
कुछ दिन बाद अर्जुन को एक पत्र प्राप्त हुआ। इंक्स ने लिखा था- "तुमने सोचा था कि यह खाली हो गया? नहीं, यह तो बस शुरुआत थी... हम फिर मिलेंगे।" अर्जुन और मीरा की आँखों में भय और जिज्ञासा दोनों की झलक दिख रही थी। --- ## **
अध्याय 15: नई यात्रा की ओर **
क्या अर्जुन और मीरा ने वास्तव में श्राप को हरा दिया था, या यह किसी और वैज्ञानिक रहस्य की शुरुआत थी? ये तो समय ही संकेत है... (कहानी बाहर... या फिर रिलीज़?)




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